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 एक आध्यात्मिक क्रांति

 A Spiritual Revolution

 

 

 अपनी आँखें खोलिए!

 वैज्ञानिक - तार्किक - संभावित

 Scientific - Logical - Possible

 

 एक सन्देश

हमारे भारत देश में आजादी के समय 
श्री सुभाष चन्द्र बोस का नारा था :

 

 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।'

 

 मेरा नारा केवल यह है कि यदि आप मेरी गहन शोध की गई बातों को पढेंगे, समझेंगे व लोगों को पढायेंगे और समझायेंगे तब मैं आपको अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, बंगलादेश, तिब्बत, भूटान व श्रीलंका दूंगा। क्योंकि ये सभी व अन्य देश अखंड भारत देश के अंग हुआ करते थे। यह केवल भारत देश में पिछले तीन हजार वर्षों से कार्बन डाईआक्साईड के प्रदूषण बढने के कारण से ही भारत देश से अलग हुए हैं। भारत देश में जैसे ही आक्सीजन की मात्रा बढती जाएगी तब यह अलग हो गये देश  पुन: भारत देश में वापस मिल जाएंगे। अब प्रश्न यह उठता है कि इस आक्सीजन की मात्रा को कैसे बढाया जाये। इस आक्सीजन की मात्रा को योग-धारणा-ध्यान-समाधि-ज्योतिष विज्ञान (वेदों का नेत्र)- वास्तु विज्ञान व पंच तत्वों के सिद्धांत के अनुसार बहुत ही सहजता से बढाया जा सकता है। अत: अखंड भारत देश कि पुन: प्राप्ति के कार्य को करने के लिए किसी भी प्रकार से कोई भी युद्ध करने की आवश्यकता नहीं है।

 

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एक आध्यात्मिक क्रांति
अपनी आँखें खोलिए

क्या आपके परिवार में किसी की मृत्यु होने के पश्चात् उस मृत् व्यक्ति के शरीर का शमशान घाट पर ले जाकर अग्नि में अंतिम संस्कार किया जाता है ?

क्या आप अपने ताऊ, चाचा की लड़की को बहन मानकर उससे अपनी  कलाई पर राखी बंधवाते है ?

क्या आप अपने घर में परिवार के साथ होली व दीपावली का त्यौहार मनाते हैं ?

तब शत प्रतिशत वैज्ञानिक रूप से आपकी धार्मिक जड़ें हिन्दू सनातन धर्म से जुड़ी हुई हैं क्योंकि ये सभी धार्मिक मान्यताएँ व त्यौहार हिन्दू सनातन धर्म के द्वारा स्थापित किये गये हैं ?

यह लेख आपके मन व मस्तिष्क पर तथाकथित भगवानों व गुरुओं के द्वारा पिछले तीन हजार वर्षों से चढाई गई धूल को हटाने का वैज्ञानिक कार्य कर आपको हिन्दू सनातन धर्म (अर्थात आपके असली घर ) में आने का निमन्त्रण दे रहा है | यह लेख आपके शरीर, मन -मस्तिष्क व आपके घर परिवार में कार्बन डाईआक्साईड के प्रदूषण को समाप्त कर देगा तथा जीवनदायिनी आक्सीजन की मात्रा को बढा कर आपके जीवन व घर में सुख - शांति की वृद्धि करेगा।  

जब से मैंने होश संभाला है तब से यह बात सुनता चला आ रहा हूँ कि इस भारतवर्ष पर आठ सौ वर्षों तक विदेशी मुस्लिम व दो सौ वर्षों तक ईसाई अर्थात अंग्रेजों ने राज किया है |  हमारे देश पर एक हज़ार वर्षों तक विदेशियों ने कब्जा करके राज किया|

जैसे एक स्त्री कभी भी सीधे - सीधे एक बच्चे को जन्म नहीं दे सकती | बच्चे को जन्म देने से पहले वह गर्भवती होती है और गर्भवती होने से पहले वह किसी पुरुष के साथ संभोग करती है| बच्चा पैदा होने से पहली क्रिया संभोग होती है | दूसरा कार्य गर्भवती होना तथा तीसरा कार्य नौ महिने के पश्चात बच्चे को जन्म देना होता है |

ठीक इसी तरह से हमारे भारत देश की एक हज़ार वर्षों की गुलामी को जानने से पहले आपको उस गुलामी के पूर्व तीन हज़ार वर्षों के इतिहास को अवश्य देखना होगा| हिन्दू सनातन धर्म के साथ ठीक वैसा ही कुछ हुआ जैसा कि आज कल की नामचीन कम्पनियों में होता है | इन बड़ी-बड़ी कम्पनियों में काम करने वाले बड़े अधिकरी उस कम्पनी की विशेष बातों की जानकारी को चुरा कर उस कम्पनी से अलग एक कम्पनी बना लेते हैं | जिस कारण से उस पुरानी कम्पनी को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है |

इसी प्रकार से पिछले तीन हज़ार वर्षों से सनातन धर्म के क्षत्रिय वर्ण में पैदा हुए बड़े -बड़े राजाओं ने हिन्दू धर्म से प्राप्त ज्ञान को एक अलग धर्म के नाम से प्रचलित कर दिया | अपने को भगवान मान कर अपना अलग धर्म स्थापित कर दिया | हिन्दू सनातन धर्म के विरुद्ध धर्म प्रचार करना शुरु कर दिया | आपको ज्ञात होगा की इन सभी राजाओं को सारे साधन उपलब्ध होते हैं| इन राजाओं की एक ही इच्छा होती है कि जनता उन्हें भगवान समझे | इस तरह की कुंठित भावना से ग्रस्त इन क्षत्रिय राजाओं ने धार्मिक चादर ओढ कर अपने अलग - अलग धर्म स्थापित कर डाले | हिन्दू धर्म के क्षत्रिय वर्ण में जन्मे क्षत्रिय राजा यदि अपने अलग-अलग धर्म स्थापित न करते , वह केवल हिन्दू सनातन धर्म का ही प्रचार - प्रसार करते तो आज नेपाल कि तरह चीन , जापान , कोरिया , हांगकांग , सिंगापुर , थाईलैंड , भूटान , श्रीलंका और न जाने ऐसे कितने देश आज हिन्दू राष्ट्र बने होते |लेकिन इन धोखेबाज नपुंसक शिखण्डी क्षत्रिय राजाओं ने हिन्दू सनातन धर्म के साथ धोखा किया | आप इन बातों से हिन्दू (सनातन) धर्म के साथ किये गये धोखे व हानि को आप भली - भांति समझ सकते हैं|

अहिंसा सत्यानाशो धर्म:

मैंने अपने लेख में तथाकथित भगवान बने क्षत्रिय राजाओं के लिये नपुंसक व शिखंडी शब्द का प्रयोग किया है | भारत देश में पिछले तीन हज़ार वर्षों से इस अवैज्ञानिक 'अहिंसा' शब्द का प्रचार - प्रसार व नारा लगाया जा रहा है | इस अवैज्ञानिक व अप्रकृतिक नारे ने ही भारत देश व हिन्दू (सनातन) धर्म को कमज़ोर कर कार्बन डाईओक्साईड का प्रदूषण फ़ैलाया है | प्रकृति ने गाय व बकरी जैसे अहिंसक पशुओं को भी अपनी रक्षा करने के लिये सिर पर सींग लगाये हैं | आखिर कोई भी अपनी रक्षा बिना हिंसा किये कैसे कर सकता है | आप भोजन बिना दातों के चबाये कैसे खा सकते हैं तथा एक पुरुष स्त्री के साथ बिना आक्रामक हुए आखिर संभोग क्रिया में कैसे उतर सकता है ? मेरी समझ से अहिंसक होना स्त्रैण गुण है | क्योंकि यदि स्त्री में अहिंसक गुण नहीं होगें तो वह कभी भी पुरुष के साथ संभोग क्रिया में नहीं उतर सकती | एक स्त्री में यदि अहिंसक गुण नहीं होंगे तो वह कभी भी एक बच्चे की माँ बन कर बच्चे को नहीं पाल सकती | एक स्त्री में यदि अहिंसक गुण नहीं होंगे तो वह स्त्री अपने बच्चे को अपने स्तनों का दूध नहीं पिला सकती | अत: एक स्त्री में शत प्रतिशत अहिंसक गुणों का होना अति आवश्यक है| ये सभी बातें प्रमाणित करती है कि अहिंसा एक स्त्रैण गुण है | ठीक इसके विपरीत एक पुरुष एक बच्चे को आपनी छाती से लगाकर दूध पिलाने का कार्य कभी नहीं कर सकता | यदि कोई पुरुष अहिंसा की बात कर इस अहिंसा का प्रचार व प्रसार करता है तब निश्चित रूप से उस पुरुष मे पौरुषय (नर) गुणों के हारमोन कम हो गये हैं तथा ऐसे पुरुष में स्त्रैण गुण बढ़ गये हैं | अत: वैज्ञानिक रूप से स्त्रैण गुण वाला पुरुष स्त्री को भी संभोग क्रिया में संतुष्ट नहीं कर सकता । ऐसा स्त्रैण गुण वाला पुरुष स्त्री को हमेशा बातों में ही लगाकर रखता है | वह अपनी पत्नी को बाज़ार में ले ज़ाकर घुमाने - फिराने में समय व्यतीत करता रहता है तथा वह संभोग क्रिया से अपने आपको हरसंभव बचाता रहता है | आज अमेरिका में स्त्रियों में बढ गये पौरूषय (नर) हारमोन का तथा पुरुष में बढ गये स्त्रैण हारमोन का ईलाज किया जा रहा है। इसलिये मेरी समझ से अहिंसा एक अधार्मिक व शत प्रतिशत रूप से अवैज्ञानिक नारा है | इसकी सही व्याख्या है : अहिंसा सत्यानाशो धर्म: |

 

भगवान होने के वैज्ञानिक मापदण्ड क्या हैं ?  

 

 

 

  जब जब होइ धरम कै हानी | बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी ||
तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा | हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा ||

 

 

 भगवान श्री रामचन्द्र जी

 

 

 भगवान श्री कृष्ण जी

तथाकथित भगवान बनने की गलत प्रथा बड़ी तेजी से पिछले तीन हजार वर्षों से आज तक लगातार बढती चली आ रही है | आखिर कैसे आप किसी में भगवान व भगवतीय गुणों को पहचाने ? यह बात आपको समझनी होगी कि किसी भी व्यक्ति के द्वारा कोई बड़ा ग्रन्थ लिखने में योग - साधना में समाधि की स्थिति को प्राप्त कर समाधिष्ट होने, अच्छे प्रवचन करने वाले व्यक्ति में और भगवान व भगवतीय गुणों के बीच में एक बहुत बड़ा अन्तर है | भगवान व भगवतीय गुण होने के लिये शास्त्र व शस्त्रों का संपूर्ण ज्ञान का होना अति आवश्यक है | क्योंकि मनुष्य जाति में शांति मीठी - मीठी बातों से नहीं प्राप्त होती | ऐसी बातों से केवल अच्छा समय ही काटा जा सकता है | मनुष्य जाति के लिए सबसे बड़ी व सर्वप्रथम आवश्यकता सुरक्षा चाहिए होती है | जब किसी देश व धर्म की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है तब उस देश व धर्म की हर एक बात पर प्रश्न चिन्ह लग जाता है | जब देश व धर्म की सुरक्षा खतरे में पड़ जायेगी तब ऐसे ग्रन्थ लिखने वाले, समाधि की स्थिति प्राप्त समाधिष्ट व अच्छे प्रवचन करने वाले तथाकथित भगवान आपके देश व धर्म की सुरक्षा नहीं कर पायेंगे | वैज्ञानिक रूप से भगवान व भगवतीय होना तभी संभव है जब आपके देश व धर्म की रक्षा की जा सकती हो | अत: भगवान व भगवतीय होने के लिए शास्त्र व शस्त्रों का पूर्ण ज्ञान होना परम आवश्यक है क्योंकि शास्त्र व्यक्ति को होश में और शस्त्र जोश में रखता है | भगवान श्री रामचन्द्र जी व भगवान श्री कृष्ण जी को शास्त्र व शस्त्र दोनों का संपूर्ण ज्ञान था | इन्होनें भारत देश में धर्म की स्थापना कर देश व जनता को सुरक्षा प्रदान की | उपयुक्त सुरक्षा सबसे प्रमुख व्यवस्था है तथा मेरी समझ से सुरक्षा व्यवस्था संपूर्ण जगत की सभी व्यवस्थओं को जन्म देती है | अत: सुरक्षा व्यवस्था को सभी व्यवस्थओं की जननी कहना बिल्कुल सही होगा |

किसी स्वस्थ मनुष्य को यदि एक प्रदूषित वातावरण में रखा जाए तथा उसे कम आक्सीजन प्रदान की जाए और कार्बन डाईआक्साईड की मात्रा ज्यादा बढ़ा दी जाये तब उस मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाएगी और वह घातक बीमारियों का शिकार आसानी से बन जाएगा |

ऐसे तथाकथित क्षत्रिय राजाओं के हिन्दू (सनातन) धर्म के विरुद्ध कार्य के कारण ही हिन्दू धर्म में भी आक्सीजन की मात्रा घट गई और कार्बन डाईआक्साईड की मात्रा बढ गई | इसी मूल कारण से संपूर्ण हिन्दू धर्म व भारत देश कमजोर पड़ता चला गया | इस पर ईस्लाम व ईसाई मज़हबों ने कब्जा कर लिया |

मेरी समझ से आज हिन्दू सनातन धर्म को ईसाई व ईस्लाम से जैसा खतरा समझा जा रहा है वैसा जरा सा भी खतरा नहीं है | बल्कि आज ईस्लाम को सबसे बड़ा खतरा ईसाईयों से है तथा ईसाइयों को सबसे बड़ा खतरा ईस्लाम से है | इसी तरह हिन्दू सनातन धर्म व भारत को सबसे बड़ा खतरा उन धर्मों से है जो तथाकथित धर्म हिन्दू सनातन धर्म से सभी बातों को चुराकर अपना अलग धर्म बनाकर संपूर्ण जगत में कार्बन डाईआक्साईड के प्रदूषण को फ़ैला रहे हैं |

हमारे भारत देश में पिछले तीन हजार वर्षों से जो कार्य किया गया है वह वैसा ही है जैसे बच्चे के पैदा होने के पीछे सबसे पहले कारण संभोग का होता है | जिसके कारण से भारत देश की रीढ हिन्दू धर्म ही कमजोर पड़ गया तब उसकी कमर पर चढ़कर पिछले एक हजार वर्षों तक ईस्लाम व ईसाई विदेशी मज़हबों ने राज किया |

भारत देश जगत-गुरू व सोने की चिड़ियाँ

आपने सुना होगा कि संपूर्ण जगत का गुरू भारत को कहा जाता था तथा एक समय में यह देश सोने की चिड़ियाँ भी कहलाता था | इसका मुख्य कारण यह था कि उस समय हिन्दू धर्म में तथाकथित धर्म, तथाकथित भगवान व गुरू उर्फ़ कार्बन डाईआक्साईड का प्रदूषण नहीं था | यदि ये हिन्दू सनातन धर्म से गलत, शिखण्डी, नपुंसक क्षत्रिय राजाओं से संपोषित तथाकथित धर्म, भगवान एवं गुरू के द्वारा कार्बन डाईआक्साईड के प्रदूषण को समाप्त कर दिया जाए तब निश्चित रूप से भारत देश व हिन्दू सनातन धर्म में आक्सीजन की मात्रा बढ़ जाएगी तथा भारत देश व हिन्दू सनातन धर्म पुन: जगत गुरू व सोने की चिड़ियाँ का स्थान प्राप्त कर लेगा क्योंकि हमारे देश की सभी वर्तमान समस्याएँ भी कार्बन डाईआक्साईड बढ़ने के कारण से ही बनी हुई हैं | ये सभी समस्याएं आक्सीजन की मात्रा बढ़ने से स्वयंमेव ही नष्ट हो जायेंगी |

भारत देश की रीढ हिन्दू सनातन धर्म को कमजोर करने वालों को केवल आदि गुरू शंकराचार्य ने ही भगाया था | आदि शंकराचार्य के पश्चात हमारे भारत देश में सनातन धर्म को मजबूत करने का वैसा कार्य आज पुन: शुरू करने की बहुत ही महती आवश्यकता है | क्योंकि आज हिन्दू सनातन धर्म के विरूद्ध बहुत बड़ी शक्तियाँ सक्रिय होकर साजिश रच रही हैं |आज आप आध्यात्मिक टीवी चैनलों पर ऐसे तथाकथित आध्यात्मिक षष्टांग योगियों को देख सकते हैं कि कैसे ये तथाकथित षष्टांग योगी एक योजनाबद्ध रूप से जल समाधि , भूमि समाधि लेने वालों को तथा भागवत कथा-राम कथा करने वालों को व ज्योतिष विज्ञान , वास्तु विज्ञान के विषय में उल्टी सीधी बकवास करते हैं | गंगा के विरूद्ध यह कहते हैं कि इस में डुबकी लगाने से यदि मनुष्य के पाप समाप्त हो जाते हैं तो कोई भी व्यक्ति दो - चार लोगों की हत्या कर गंगा में जाकर डुबकी लगाकर अपने पापों से मुक्ति पा सकता है | तथा मूर्ति-पूजा के विषय में यह कहा जाता है कि यदि पत्थर पूजने से भगवान मिल सकते हैं तो पहाड़ को पूजेंगे तो और भी बहुत कुछ मिल सकता है | ऐसी तथाकथित बातों से मूर्ति-पूजा पद्धति को अपमानित किया जा रहा है |  

 लाखों वर्षो से प्रात:काल तांम्बे (धातु) के बने बर्तन (लोटे) में जल भर कर भगवान सूर्य नारायण को जल देने की प्रथा चली आ रही है, इस प्रथा की यह कह कर हंसी उड़ाई जा रही है कि एक बर्तन (लोटे) के द्वारा दिया गया जल यदि भगवान सूर्य नारायण तक पहुँच सकता है तब इस प्रकार से हम भी अपने गाँव,खेतो और अपने रिश्ते के लोगों की ओर अपना मुँह कर के जल चढ़ाएँगे तब वह जल हमारे गाँव, खेत और अपने रिश्ते के लोगों तक पहुँच जायेगा| लेकिन ऐसे तथाकथित मूर्ख गुरुघंटालों की बुध्दि का स्तर अभी एक चूहे की बुध्दि के स्तर जैसा ही है| ऐसे तथाकथित मूर्ख गुरुघंटालों को अभी यह पता ही नहीं कि प्रात: काल ताम्बे के बने लोटे से सूर्य नारायण को जल देने के पीछे भी शतप्रतिशत वैज्ञानिक आधार हैं| यदि भूमि पर बिखरे जल पर विधुत को तार के द्वारा प्रवाहित करेंगें तब शीघ्र ही वह विधुत भूमि पर पड़े जल में फ़ैल जाएगी क्योंकि जल में ऊर्जा को अपनी ओर खींचने की शक्ति होती है| इसी वैज्ञानिक कारण से बरसात के मौसम में बिजली के खम्बों के माध्यम से भूमि पर गिरे जल में बिजली फ़ैल जाती है| इस कारण से ही बरसात के दिनों में आकाश से बिजली भूमि पर पड़े जल की ओर आकर्षित होने के कारण से बड़ी जन,धन की हानि होती है|

 

 जब आप प्रात: तांम्बे के बर्तन में जल भर कर सिर के ऊपर से भगवान सूर्य नारायण को जल चढ़ाते है, तब आप के सिर के ऊपर से भूमि पर गिर रहे जल के माध्यम से भगवान सूर्य नारयण की तरंग ऊर्जा जल में एकत्र होकर आप के शरीर की नकारात्मक उर्जा को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा कर आप को अच्छा स्वास्थ प्रदान करती है|

 

 मेरे इस लेख को पढ़ने के बाद ऐसे तथाकथित मूर्ख गुरुघंटाल भी प्रात: उठकर भगवान सूर्य नारायण को ताम्बे के बर्तन में जल भर कर अपने सिर के ऊपर से चढ़ाऐंगे जिस के बाद चूहे जैसी बुध्दि वाले ये तुच्छ मनुष्य पुन: उच्च बुध्दि को प्राप्त कर सकेंगे|

 

 सनातन धर्म के लोगों के घरों में पूजा-पाठ व सत्यनारायण की कथा करने वाले ब्राह्मणों को गालियाँ  देकर अपमानित किया जा रहा है | जबकि घर में ब्राह्मणों के द्वारा पूजा-पाठ व सत्यनारायण की कथा और घरों में ब्राह्मणों को भोजन कराने के पीछे भी अपने शत प्रतिशत वैज्ञानिक आधार हैं | ज्योतिष विज्ञान के सिद्धान्त के अनुसार ग्रहों में बृहस्पति ग्रह को सबसे शुभ ग्रह माना जाता है | गौ-माता, स्वर्ण धातु तथा ब्राह्मण में बृहस्पति ग्रह का शुभ प्रभाव सबसे अधिक मात्रा में माना जाता है | इसीलिए घर - परिवार में सुख - शांति के लिये ब्राह्मणों को घर में बिठाकर पूजा-पाठ, सत्यनारायण की कथा व ब्राह्मणों को भोजन करवाया जाता है | केवल सनातन धर्म के ब्राह्मण ही मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक साथ खड़े रहते हैं और साथ निभाते भी हैं |

 

ठीक इसके विपरीत मैट्रोसिटी में आज घर-परिवारों के खंडित होने का मुख्य कारण तथाकथित षष्टांग योगा गुरू व तथाकथित प्रवचन करने वालों को बुलाया जाना है | आज मैट्रोसिटी में हर दूसरे-तीसरे घर में दो-एक विधवा स्त्रियाँ बैठी होती हैं | इसका मुख्य कारण यह है कि तथाकथित षष्टांग योगा गुरू व तथाकथित प्रवचन करने वाले गुरू घंटालों को ज्योतिष विज्ञान , वास्तु विज्ञान व पंच तत्वों का संपूर्ण ज्ञान होता नहीं है | ऐसे दाढी वाले बाबा षष्टांग योग गुरू व दाढी वाले प्रवचन करने वाले बाबा गुरू घंटालों में असुर समूह के ग्रह बुध , शुक्र , शनि , राहु - केतु का अशुभ प्रभाव बहुत अधिक मात्रा में होता है | इसलिये आज भारत देश की मैट्रोसिटी में घर परिवार बीमारियों का गोदाम बनकर रह गये हैं

हिन्दू सनातन धर्म में पुन: वापसी के वैज्ञानिक लाभ

आज जो परिवार हिन्दू सनातन धर्म की प्रथाएं व मान्यताएँ मानने के पश्चात भी आज हिन्दू सनातन धर्म से भटक गये है, उन परिवारों के हिन्दू सनातन धर्म में पुन: वापसी के वैज्ञानिक लाभों की चर्चा करेंगे |

मैं अपने परिवार में घटी हृदय विदारक घटनाओं से इसको सिद्ध करूँगा | 1988 में मेरी माताजी की मृत्यु के पश्चात मेरे तीन जवान भाई व एक जवान भतीजे की आकस्मिक मृत्यु हो चुकी है | मेरे एक जवान भाई की मृत्यु ठीक दीपावली वाले दिन सांय सात बजे हुई थी जब लोग घरों में दीपावली के दीये जला रहे थे | मैं और मेरा परिवार अपने भाई के मृत् शरीर को गाड़ी में लेकर सड़क से घर आ रहे थे | एक आदमी गाड़ी के आगे - आगे चल रहा था जिससे की वह सड़क पर से बम व पटाखे चलाने वालों को हटा सके |

मेरे भतीजे को घोड़ी पर बैठना था लेकिन उस जवान भतीजे के मृत शरीर को दूल्हा बनाकर शमशान घाट पर अंतिम दाह-संस्कार करने के लिए ले जाना पड़ा | क्योंकि ऐसी मान्यता है कि जिस व्यक्ति की शादी होने वाली हो और उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाये तब ऐसे मृत् व्यक्ति का अंतिम संस्कार दूल्हा बना कर ही किया जा सकता है

मेरे परिवार में घटी इन घटनाओं ने मुझे तोड़ कर रख दिया | मैंने अच्छा भला चला-चलाया व्यापार छोड़ दिया और अपने परिवार में हुई इन हृदय विदारक घटनाओं पर गहन शोध आरम्भ कर दिया | आप मेरी व्यापारिक व मेरे संपूर्ण जीवन की स्थिति को जानने के लिये यहां क्लिक करें !

आईये, मैं अब आप को अपने इस गहन शोध से अवगत करवाता हूँ | मेरे पिताजी ने बचपन की शिक्षा गुरूकुल में प्राप्त की | वे अष्टांग योगी थे तथा बचपन से ही योग साधना किया करते थे | वे आर्य समाज विचार धारा से प्रभावित थे तथा स्वामी दयानन्द की बताई गई बातों पर चलते थे | सनातन धर्म की मूर्ति- पूजा व ब्राह्मणों के कर्मकाण्ड का विरोध किया करते थे तथा घर में महात्मा बुद्ध की मूर्ति व बौध सम्प्रदाय का साहित्य , महावीर की मूर्ति व जैन सम्प्रदाय का साहित्य , आर्य समाज के स्वामी दयानन्द का चित्र, शिरडी के साईं बाबा की मूर्ति , चित्र और साहित्य रखते थे |

मेरे पिता के द्वारा की जा रही बातों के ठीक विपरीत मेरी माताजी घर परिवार में भगवान श्री राम चन्द्रजी व भगवान श्री कृष्ण जी की मूर्ति लगा कर गीता को घर में रखकर उसका पालन कर रही थी तथा ज्योतिष विज्ञान व वास्तु विज्ञान की भी काफ़ी सूक्ष्म जानकारी रखती थीं | घर में ब्रह्मणों के द्वारा सत्यनारायण की कथा पूर्णिमा वाले दिन करवाती थी व ब्रह्मणों को भोजन, दान - दक्षिणा भी देती थी | इन दो परस्पर विरोधी विचार धाराओं का एक ही छत के नीचे मेरे परिवार में पालन किया जा रहा था |

1988 में अचानक मेरी माता जी की मृत्यु हो गई | मेरी माता जी की मृत्यु के पूर्व घर परिवार में हर प्रकार से सुख शांति थी | परिवार तरक्की करता चला जा रहा था| क्योंकि वह सनातन धर्म की सभी मान्यताओं का पालन कर रही थी | सभी धार्मिक मान्यताएँ मेरी माता जी की मृत्यु के पश्चात बन्द हो गई | तथा हिन्दू सनातन धर्म के विरुद्ध मेरे पिता (स्व.), श्री योगी रामदेव जी की विचार धारा घर में अबाध चलती रही | वे घर में योग साधना के आसन-प्राणायम-कपालभाती व धारणा-ध्यान समाधि की ये सभी योगिक क्रियाएँ करते रहे | घर में आर्य समाज के पुरोहितों के द्वारा हवन करवाते रहे | घर में बौध सम्प्रदाय के महात्मा बुधजैन सम्प्रदाय के महावीरआर्य समाज के स्वामी दयानन्दशिरडी के साईं बाबा की मूर्ति-चित्र व इनके सभी साहित्य को घर में रखते रहे | जिस कारण से घर परिवार में असुर समूह के बुध-शुक्र-शनि-राहु-केतु का अशुभ प्रभाव बढने से घर में कार्बन डाईआक्साईड का प्रदूषण बढता चला गया| ज्योतिष विज्ञान के सिद्धांत के अनुसार घर परिवार में अकस्मात् मृत्यु, लड़ाई-झगड़े, मुकद्दमेबाजी इन सभी नकारात्मक बातों को करने की विशेषता रखते है : बुध-शुक्र-शनि-राहु-केतु असुर ग्रह |मेरी माताजी सनातन धर्म की मान्यताओं का पालन कर घर में देव समूह के सूर्य-चन्द्र-मंगल-बृहस्पति, ग्रह के शुभ प्रभाव को बढा रही थी | क्योंकि यह देव समूह के ग्रह घर में सुख-शांति व तरक्की कराने की विशेषता रखते हैं | जिस कारण से घर-परिवार के वातावरण में आक्सीजन की मात्रा बढ रही थी |

मैंने अपने परिवार में घटी घटनओं पर किये गहन शोध में पाया कि मेरे माता व पिता के विपरीत धार्मिक विचार धाराओं में मैंने अपनी माताजी की हिन्दू सनातन धर्म की धार्मिक मान्यताओं को अपनाया | सन् 2005 में अपने पिता के स्वर्ग सिधारने के पश्चात मैनें बौद्ध सम्प्रदाय के महात्मा बुद्ध, जैन, सम्प्रदाय के महावीर व आर्य समाज के स्वामी दयानन्द इन तीनों की मूर्ति-चित्रों सहित साहित्य व शिरडी के साईं बाबा की मूर्ति व चित्र को उठा कर यमुना नदी में बहा दिया तथा घर में अपनी माताजी के द्वारा हिन्दू सनातन धर्म की मान्यताओं का पालन करते हुए भगवान श्री राम चन्द्र व भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति व चित्रों की स्थापना की तथा अपने घर में सत्यनारायण की कथा व ब्राह्मणों को भोजन दान दक्षिणा व गायों को चारा खिला कर सेवा करता हूँ | अपने पिता की मृत्यु के पश्चात हिन्दू सनातन धर्म की मान्यताओं को मैं पूर्ण रूप से अपनाकर आज तक उसका पालन कर रहा हूँ जिस का परिणाम यह है कि आज मैं एक विश्व स्तर का एक आध्यात्मिक सलाहकार हूँ |          
मेरी spiritualconsultancy.com वेबसाइट संपूर्ण जगत में आध्यात्मिक जगत को मान सम्मान दिला रही है |

आप ने मेरे परिवार में घटी घटनाओं के कारणों को वैज्ञानिक रूप से समझा | अत: अब आप अपना समय नष्ट न कर जल्द से जल्द अपने इस हिन्दू सनातन धर्म की सच्चाई को समझें | अन्यथा कहीं आप के परिवार को मेरे परिवार जैसी हृदयविदारक घटनाओं को न भुगतना पड़े ।

लेकिन  बहुत दु:ख का विषय यह है कि आज हिन्दू सनातन धर्म के धर्मगुरू  हिन्दू सनातन धर्म के विरुद्ध सक्रिय इन शक्तियों के प्रतिरोद्यात्मक कुछ भी कार्य नहीं कर रहे हैं | यह आध्यात्मिक गुरू अपने आश्रमों में बैठे हैं और अपने आश्रमों का खर्चा एकत्र करने में ही लगे रहते हैं|

मैंने आदि शंकराचार्य के कार्य अर्थात् सनातन धर्म के विरूद्ध सक्रिय शक्तियों से लड़ाई लड़कर इन हिन्दू सनातन धर्म के विरुद्ध शक्तियों को सबक सिखाने का एक दृढ संकल्प लिया है |

आदि शंकराचार्य पैदल चलकर हिन्दू सनातन धर्म के लिए इतना बड़ा कार्य कर सकते हैं | तब हमें शर्म आनी चाहिए कि हमारे पास संपूर्ण जगत में अपनी बात पहुंचाने के लिए आज इंटरनेट व इलैक्ट्रानिक मीडिया जैसे साधन होते हुए भी यदि आज हम हिन्दू सनतान धर्म को उसका सही स्थान नहीं दिला सकते है | तब हमें चुल्लू भर पानी में डूब कर मर जाना चाहिए या ऐसे आध्यात्मिक व्यक्तियों को कम से कम मेरा तो तन-मन-धन से साथ देना चाहिए | क्योंकि मैंने आज आदि शंकराचार्य के कार्य को आगे बढाने का संकल्प लिया है

मैंने जब यह लेख अपने आस-पास के लोगों को पढाया तब लोगों ने मेरा यह लेख पढकर मुझे यह समझाया कि मैं हिन्दू सनातन धर्म के बड़े आध्यात्मिक गुरूओं से संपर्क करूं व अन्य हिन्दू संगठनों से मिलकर अपने इस धर्म क्रांति के कार्य को आगे बढाऊं।

मैंने अपने आस-पास के लोगों को यह समझाया कि आज सलाह कि नहीं सहयोग की आवश्यकता है। आप मुझे अपने तन-मन-धन इन तीनों में से एक का सहयोग अवश्य दें। मैं हिन्दू धर्म के बड़े आध्यात्मिक गुरुओं के पास जाकर अपने बहुमूल्य समय को नष्ट नहीं करना चाहता हूँ क्योंकि ये बड़े आध्यात्मिक गुरू यदि किसी काम के होते तो मुझे आज इस कार्य को करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

जहाँ तक रहा यह दूसरा प्रश्न कि मैं अन्य हिन्दू संगठनों के पास जाकर इस कार्य के लिये सहयोग मांगू तो मांगने वाला हमेशा एक भिखारी होता है । हमेशा कमजोर लोग ही मांगते हैं तथा संगठन हमेशा कमजोर लोगों का ही होता है । झाडू हमेशा कमजोर तीलियों को लेकर ही बनाई जाती है। ठीक इसीलिये झाड़ू का अपना कोई अस्तित्व नहीं होता | झाड़ू को हमेशा किसी न किसी हाथ की गुलामी करनी पड़ती है | तथा संगठन जंगल में भेड़ियों के बीच की व्यवस्था है। क्योंकि जंगल में अकेला एक भेड़िया कभी भी शिकार नहीं कर सकता। अपने को संगठित कर ही जंगल में भेड़िये जीवित रह सकते हैं। मेरी समझ से संगठित होना राक्षसी कार्य है । क्योंकि मनुष्य हमेशा संगठित होकर ही गलत कार्य करता है। आज आप बड़े माफ़िया, अंडरवर्ल्ड व आतंकवादी संगठनों को देख सकते हैं कि ये किस प्रकार से संगठित होकर संपूर्ण मनुष्य जाति की शांति को भंग कर रहे हैं। ज्योतिष विज्ञान के सिद्धान्त के अनुसार किसी भी संगठन में कार्य करने वाले व्यक्ति पर राक्षस ग्रुप के बुध-शुक्र, शनि, राहु-केतु का दुष्प्रभाव बढने से संगठन में कार्य करने वाले व्यक्ति के घर परिवार व स्वयं के जीवन में घटना-दुर्घटना मुकदमेबाजी, लड़ाई-झगड़ा तथा परिवार में आकस्मिक जवान मृत्यु तक होती है। क्योंकि यह राक्षस ग्रुप के बुध-शुक्र, शनि, राहु, केतु, ये सभी ग्रह ऐसी बातों को देने की विशेषता रखते हैं। शेर कभी भी जंगल के बहुत सारे शेरों को संगठित कर जंगल का राजा नहीं बना होता। जंगल में शेर अकेले अपने बल पर जंगल का राजा बना होता है। क्योंकि जंगल में शेर के ऊपर देव समूह के सूर्य-चन्द्र-मंगल-बृहस्पति का शुभ प्रभाव बहुत अधिक मात्रा में होता है।

संपूर्ण जगत में बड़ी क्रांति करने वाले हमेशा अपने घर से बिल्कुल अकेले ही चले थे। 'लोग आते गये कारवां बनता गया।' संगठन, व्यवस्था, प्रशासन व्यापार करने के लिए या किसी मल्टीनैशनल कंपनी को चलाने के लिये ही ठीक है ना कि धर्म क्रांति करने के लिए।

अपील

मेरा आप सबसे एक नम्र निवेदन है कि इस लेख को पढने के पश्चात इसे ऐसे ही कहीं व्यर्थ में भुला न दें। यदि आपने ऐसा किया तब मेरे एक मुस्लिम मित्र की बात सही साबित हो जायेगी। मैंने अपने मित्र से पूछा कि मुसलमान हिन्दुओं को काफ़िर क्यों कहते है ? तब उसने मुझे यह बताया कि एक मुसलमान ईस्लाम के लिये सब कुछ छोड़ सकता है। यदि किसी हिन्दू को धर्म तथा किसी जरूरी कार्य में से एक को चुनना हो तो वह आम हिन्दू धर्म के कार्य को छोड़ देगा तथा अपने जरूरी कार्य को पहले पूरा करेगा ।

एक आम हिन्दू सनातन धर्म की थाली में छेद करने वाले किसी तथाकथित षष्टांग योगा गुरू घंटाल का चेला बन कर व अपने देवी देवताओं की पूजा अर्चना को छोड़कर तथाकथित षष्टांग योगा गुरू घंटाल की पूजा अर्चना करेगा। तथा अपने घरों में ऐसे तथाकथित गुरू घंटालों के चित्र जैसे कि श्री श्री मणिशंकर फ़ाउंडर (आर्ट आफ़ स्लीपिंग कोर्स) तथा बचपन में घर छोड़कर हरिद्वार भाग आये षष्टांग भोगीराज स्वामी घासी राम देव जी महाराज ( संस्थापक डाक्टर पातंजलि योग पीठ हरिद्वार) लगाएगा। आज जंगली घास की तरह ऐसे तथाकथित नकली ढोंगी बाबा मल्टीनेशनल कम्पनियों की तरह करोड़ों अरबों रुपया बना कर संपूर्ण जगत व आध्यात्मिक जगत में व हिन्दू सनातन धर्म में कार्बन डाईआक्साईड का प्रदूषण फ़ैला रहे हैं।

अष्टांग योग और षष्टांग योगा में क्या अन्तर है ?

 अष्टांग योग
 
 
 षष्टांग योगा गुरू
 
 

इस विषय की और अधिक वैज्ञानिक जानकारी प्रप्त करने के लिये यहाँ क्लिक करें | पिछले तीन हजार सालों से हिन्दू सनातन धर्म में पैदा हुए आध्यात्मिक गुरू जनता को गुमराह कर अपने अलग धर्म स्थापित कर रहे हैं। यह कार्य आज भी हिन्दू सनातन धर्म में किया जा रहा है। सनातन धर्म में जैसे गलत कार्य किया जा रहा है ईस्लाम मज़हब में ऐसा कार्य करने वाले किसी भी आध्यात्मिक व्यक्ति को जिन्दा नहीं छोड़ा जाता । ईस्लाम में अल्ला ताला व कुरान-ए-पाक से अलग आध्यात्मिक बात करने वाले किसी तथाकथित आध्यात्मिक गुरू को जहन्नुम रसीद कर सुपुर्द-ऐ-खाक कर दिया जाता है। अर्थात फ़तवा जारी कर ऐसे तथाकथित आध्यात्मिक गुरू का सर कलम कर कत्ल कर दिया जाता है। इसी मुख्य कारण से आज संपूर्ण जगत में ईस्लाम मज़हब ने अपने जन्म के 1430 वर्षों की बहुत छोटी अवधि में पचास के करीब ईस्लामिक देशों की स्थापना कर दी है। हिन्दू सनातन धर्म में बढ गये कार्बन डाईआक्साईड के प्रदूषण के कारण से पिछले तीन हजार वर्षों से आज यह स्थिति है कि हिन्दू सनातन धर्म अपने ही देश में बीमार स्थिति में है।लेकिन कोई बात नहीं । कहा है : जब जागो तभी सवेरा!

अब आप मेरे इस लेख को पढ कर जाग चुके हैं ? अब आप केवल एक कार्य करें कि मेरे इस लेख को ज्यादा से ज्यादा हिन्दू सनातन धर्म के हिन्दुओं व हिन्दू सनातन धर्म से भटक गये लोगों को पढवा कर हिन्दू धर्म में आक्सीजन की मात्रा को बढाएँ। निश्चित रूप से यह आक्सीजन की मात्रा बढते ही बहुत ही कम समय में संपूर्ण सनातन धर्म स्वस्थ व बलवान हो कर खड़ा हो जायेगा।

 अपनी छाती ठोक कर
गर्व से कहो हम हिन्दू हैं।

आने वाले समय में शिक्षा-साईंस और लाजिक की आँधी में वही धर्म बच पाएगा जो इनकी कसौटी पर सौ प्रतिशत खरा उतर पाएगा। संपूर्ण जगत के सभी शिक्षित, वैज्ञानिक और बढे उद्योगपति हिन्दू (सनातन) धर्म को अपनाएंगे क्योंकि केवल इसी धर्म के पास ही योग, धारणा, ध्यान, समाधि, ज्योतिष विज्ञान, वास्तु विज्ञान, पंच-तत्वों का सिधांत, वेद-पुराण, शास्त्र तथा अन्य विज्ञान के विशाल भंडार है। हिन्दू (सनातन) धर्म ही साईंटिफ़िक, लाजिकल और पासिबल रूप से सच्चे अर्थों में धर्म है।

एक संदेश

हमारे भारत देश में आजादी के समय श्री सुभाष चन्द्र बोस का नारा था:

'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।'
 

 मेरा नारा केवल यह है कि यदि आप मेरी गहन शोध की गई बातों को पढेंगे, समझेंगे व लोगों को पढायेंगे और समझायेंगे तब मैं आपको अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, बंगलादेश, तिब्बत, भूटान व श्रीलंका दूंगा। क्योंकि ये सभी व अन्य देश अखंड भारत देश के अंग हुआ करते थे। यह केवल भारत देश में पिछले तीन हजार वर्षों से कार्बन डाईआक्साईड के प्रदूषण बढने के कारण से ही भारत देश से अलग हुए हैं। भारत देश में जैसे ही आक्सीजन की मात्रा बढती जाएगी तब यह अलग हो गये देश पुन: भारत देश में वापस मिल जाएंगे। अब प्रश्न यह उठता है कि इस आक्सीजन की मात्रा को कैसे बढाया जाये। इस आक्सीजन की मात्रा को योग-धारणा-ध्यान-समाधि-ज्योतिष विज्ञान (वेदों का नेत्र)-वास्तु विज्ञान व पंच तत्वों के सिद्धांत के अनुसार बहुत ही सहजता से बढाया जा सकता है। अत: अखंड भारत देश कि पुन: प्राप्ति के कार्य को करने के लिए किसी भी प्रकार से कोई भी युद्ध करने की आवश्यकता नहीं है ।

आप तथाकथित दाढी वाले इन्टरनेशनल षष्टांग योगा गुरू घंटाल के पोस्टमार्टम की अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

 
 
 
 
 
 इन सभी जन्म कुंडलियों की जानकारी प्राप्त करने के लिये यहाँ क्लिक करें
 

 विनम्र निवेदन

 

 पाठको मेरा आपसे एक नम्र निवेदन है कि यदि मेरे 'एक आध्यात्मिक क्रांति' के लेख  में शोध की गई बातों से सहमत हैं तब आप से मेरी एक विनम्र प्रार्थना है कि आप मुझे अपने तन-मन-धन इन तीनों में से एक का सहयोग अवश्य दें|

 

 पहला सहयोग - तन : आप अपने आस-पास के सभी लोगों को यह आध्यात्मिक क्रांति का लेख अवश्य पढ़वायें|

 

 दूसरा सहयोग - मन : आप अपने मन में ऐसे विचारों को लायें जो कि सनातन धर्म को उच्चतर स्थान दिला सकें|

 

 तीसरा सहयोग - धन : यदि आप तन व मन का सहयोग नहीं दे सकते तो अवश्य ही मुझे धन का सहयोग दें क्योंकि जब बिना भोजन के भगवान का भजन भी नही किया जा सकता तब इस हिन्दू धर्म क्रांति का कार्य कैसे व किस प्रकार किया जा सकता है| आप मुझे अधिक से अधिक धन का सहयोग दें| उसी प्रकार से जैसे कि बड़े-बड़े मुसलमान ईस्लाम मजहब को संपूर्ण जगत में पहुंचाने के लिए अरबों रुपये का सहयोग देते हैं| इन मुसलमानों के धन के सहयोग के कारण से ही आज संपूर्ण जगत में ईस्लाम की इतनी मजबूत स्थिति बनी हुई है| जबकि हमें अपने आस-पास के हिन्दू (सनातन) धर्म के लोगों का भी सहयोग नहीं मिल पाता| इसलिये आप शीघ्रातिशीघ्र धर्म क्रांति के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए अधिकाधिक धन का सहयोग दें|

 

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 धन्यवाद !

 
Akhilesh Pratap Singh
Spiritual Consultant